Qismat Ka Shikar

क़िस्मत का शिकार

एल्बम वर्ग: हिन्दी, फ़िल्म
वर्ष: १९३४
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गाने


 
दाता तू है सारे जहाँ का पालनहारा
 
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हर रंग ज़माने का बदलते हुए देखा
 
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नहीं चलती है कुछ तदबीर की तक़दीर के आगे
 
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अंजामे मुहब्बत है बरबादियो रुसवाई
 
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औरत भी क्या चीज़ है प्यारी
 
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शराबों में जो डूबे फिर न उभरे ज़िन्दगानी में
 
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गोरे गोरे गालों की क्या बहार है
 
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कौन था खिलवत में जिसने दर्द पैदा कर दिया
 
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मेरे बाँके रसीले बता तो सही
 
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दुनिया में जब ज़र पाना
 
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हो गया दीवाना ग़म भी खूबिए तक़दीर से
 
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बीबी बोलो क्यों ना बनड़े से
 
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तोरे रे बाँके लोचन
 
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हे कहो रामा रामा रामा
 
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नारायण जिनके ह्रदय में सो कुछ कर्म करे न करे
 
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क्यों मुझसे दिल्लगी मेरे परवरदिगार की
 
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